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Monday, September 20, 2010
जिंदगी की जिद पर
जी रहे है हम ...
कैफे जुस्तजू को ,
पी रहे है हम ...
जश्ने फक्र को ,
न जाहिर कर , ए रकीब ...
अब अपने नासूर को ,
सी रहे है हम ... !!!
इस मर्ज़ की कोई दवा तो होगी ,
कही मेरे लिए कभी, दुआ तो होगी !
जख्म तो इतने दिए ए बेवफा ,
पर कभी तो मेरे लिए रुआ तो होगी !
दिल को समझाता हूँ बहुत, पर
ये दिल कहता है :-
कभी तो मुलाकात , सलाम - दुआ तो होगी !!!
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Rahul...
its ok u keep me in ur heart, but dont give ny space in ur mind , because people says that , i m MIND BLOWING.
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