Monday, September 20, 2010

जिंदगी की जिद पर
जी रहे है हम ...

कैफे जुस्तजू को ,
पी रहे है हम ...

जश्ने फक्र को ,
न जाहिर कर , ए रकीब ...

अब अपने नासूर को ,
सी रहे है हम ... !!!

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