Monday, September 20, 2010

इस मर्ज़ की कोई दवा तो होगी ,
कही मेरे लिए कभी, दुआ तो होगी !

जख्म तो इतने दिए ए बेवफा ,
पर कभी तो मेरे लिए रुआ तो होगी !

दिल को समझाता हूँ बहुत, पर
ये दिल कहता है :-
कभी तो मुलाकात , सलाम - दुआ तो होगी !!!

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