आज एक हरा पत्ता क्यूँ टुटा है ?
क्या हक ना था उसे ,
उस डाल से लिपटे रहने का !!!
जिससे उसने जन्म लिया था ... !!!
हवा के थपेड़ो ने क्यूँ ,
बाध्य किया उस डाली को ???
और भी तो पत्ते थे ,
जो पा चुके थे लाली को !!!
लगता है की-
इसबार बसंत उससे रूठा है ...
आज एक हरा पत्ता क्यूँ टुटा है ?
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