Tuesday, November 16, 2010

उनसे बीछडने का रश्क क्या करे ,
शाम ढले तो साया भी साथ नहीं देता ...


ख्वाबों में उनका अब ,तस्सवुर नहीं ,
बस जागने की तम्मना रखते है ...

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