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Tuesday, November 23, 2010
जामे-गम में शरीक ना होने दिया हमे...
और वो हमसे दोस्ती का दावा करते हैं !!!
Tuesday, November 16, 2010
उनसे बीछडने का रश्क क्या करे ,
शाम ढले तो साया भी साथ नहीं देता ...
ख्वाबों में उनका अब ,तस्सवुर नहीं ,
बस जागने की तम्मना रखते है ...
चलो आज मैखाने ,
शाम ढली है...
दिल के अरमाँ ,
सरेआम जली है |
अरमानों के बावस्ता ,
ना पूछ मेरे दोस्त -
दिल के कोने में ,
एक आग लगी है |
चलो आज मैखाने ,
शाम ढली है ...
Saturday, November 13, 2010
बंद गलिओं के ऊंचे छत को देखता मैं ,
अचानक ठिठक कर , रुक जाता हूँ |
जाने वो मकाँ अपना सा लगा ,
जिसके दरवाजे पर बरसों से ताला लगा है !!!
Friday, November 12, 2010
लफ्जों की जुम्बिश ने ना कहीं जो बातें ,
दिल के थमने से वो बात जाहिर हुई |
अरमाने इज़हार जज्ज्ब करता रहा मै ,
पर , दिल के आसुओं ने फ़साना लिख दिया |
आज एक हरा पत्ता क्यूँ टुटा है ?
क्या हक ना था उसे ,
उस डाल से लिपटे रहने का !!!
जिससे उसने जन्म लिया था ... !!!
हवा के थपेड़ो ने क्यूँ ,
बाध्य किया उस डाली को ???
और भी तो पत्ते थे ,
जो पा चुके थे लाली को !!!
लगता है की-
इसबार बसंत उससे रूठा है ...
आज एक हरा पत्ता क्यूँ टुटा है ?
उस कटी पतंग को मै ,
जाने क्यों देखता रह गया !!!
शायद मेरी उससे बातें हुई हों,
दर्दे-गम की मुलाकाते हो हों,
खूब उड़ा वो भी ,
बादलों की रवानियों में .
पर अब कट कर ,
गिरा है , कहीं वीरानीओं में !!!
काटने की कसक ना है ,
उसके दिल को , पर ...
कोई भी ना आया उसे ,
उस , ऊंची पेड़ से उतारने !!!
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its ok u keep me in ur heart, but dont give ny space in ur mind , because people says that , i m MIND BLOWING.
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